राहत इंदौरी साहब की शायरी हिंदी, rahat indori ki shayari.
हम ज़िद में है तुम्हारी राह तकेंगे,
अब तुम्हारी मर्ज़ी आना न आना।
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तुम्हारे साथ ये मौसम फरिश्तों जैसा है,
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सतायेगा ।
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कोई मिला ना मुझे ,
मिले भी तो मतलबी यार मिले बहुत।
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चाँद तारों की क्या बात करें
जब यार हज़ारों हैं।
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मौत आयी थी कई दिनों पहले
हमने भी बातो मै लगाए रखा।
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रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है।
एक दीवाना मुसाफ़िर है मेरी आँखों में,
वक़्त-बे-वक़्त ठहर जाता है, चल पड़ता है।।
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घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया,
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है ।।
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ख़ुद को पत्थर सा बना रक्खा है कुछ लोगों ने
बोल सकते हैं मगर बात ही कब करते हैं।।
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न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा,
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा।।
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ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था,
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था।
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