राहत इंदौरी साहब की शायरी हिंदी, rahat indori ki shayari.
क्या खरीदोगे ये बाज़ार बहुत महँगा है,
प्यार की ज़िद न करो, प्यार बहुत महँगा है।
आज तक तुमने खिलौने ही खरीदे होंगे,
दिल है ये दिल, मेरे सरकार, बहुत महँगा है।
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सभी का ख़ून था शामिल यहाँ की मिट्टी में,
इस बात से अनजान थोड़ी है पर
जिनके अब्बा ले चुके
पाकिस्तान उनके बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।।
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मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना,
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।
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मुझसे पहले वो किसी और की थी,
मगर कुछ शायराना चाहिए था।
चलो माना ए छोटी बात है,
पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था।
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अफवाह थी मेरी तबियत खराब है।
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया।
दो गज सही मगर ये मेरी मलिकियत है।
ये मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।।
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तूफनों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो।।
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हमारे पीर तक़ी मीर ने कहा था कभी,
मियाँ ये आशिक़ी इज़्ज़त बिगाड़ देती है।
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ख़ुद को पत्थर सा बना रक्खा है कुछ लोगों ने,
बोल सकते हैं मगर बात ही कब करते हैं।
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